महिला सशक्तिकरण पर निबंध – Women Empowerment Essay In Hindi

by Lalit Banjara
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Women Empowerment Essay In Hindi के इस पोस्ट में हम महिला सशक्तिकरण पर निबंध और महिला सशक्तिकरण के बारें में जानेंगे, लेकिन महिला सशक्तिकरण ( Women Empowerment In Hindi ) के बारे में जानने से पहले हमें यह समझ लेना चाहिए की हम “सशक्तिकरण” से क्या समझते है |

( Woman Empowerment In Hindi )महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य ऐसी क्षमता से है, जिससे वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सकें, जहाँ महिलाएँ परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निर्माता स्वयं हो |

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महिला सशक्तिकरण Mahila Sashaktikaran:

महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य महिलाओं को अपने लिए निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए शक्तिशाली बनाना है, महिला सशक्तिकरण महिलाओं को सशक्त बनाने की प्रक्रिया है,

सशक्तीकरण को कई तरीकों से परिभाषित किया जा सकता है. हालांकि, जब महिला सशक्तिकरण के बारे में बात की जाती है, सशक्तिकरण का मतलब उन लोगों (महिलाओं) को सक्षम बनाना है जो निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर हैं,

पहले की शताब्दियों में, उन्हें लगभग अस्तित्वहीन माना जाता था, लेकिन जैसे-जैसे समय विकसित हुआ, महिलाओं को अपनी शक्ति का एहसास हुआ | और महिला सशक्तिकरण के लिए क्रांति की शुरुआत हुई |

महिला सशक्तिकरण पर निबंध ( Women Empowerment Essay In Hindi )


Woman Empowerment In Hindi -: महिला सशक्तिकरण केवल एक शब्द ही नही बल्कि एक क्रान्ति है, प्रत्येक देश के लिए महिलाओं तथा पुरुषों को समानता का अधिकार देना आवश्यक है.

बहुत से लोग सोचते हैं कि अधिकारों के लिए लड़ने वाली महिलाओं के दिन खत्म हो गए हैं, लेकिन वे लोग गलत हैं.  भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी दूषित सोच को मारना आवश्यक है जो दहेज़ प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलु हिंशा, बलात्कार, वैश्याव्रत्ति, मानव तश्करी, महिलाओं का शोषण और ऐसी ही अन्य राक्षसी सोच को बढ़ावा देती है.

आज भारत, और विश्व के लगभग सभी देशों में यह सोच व्याप्त है, और जिसके फलस्वरूप लैंगिक असमानता के कारण दिन व दिन यह असमानता का भाव हिंसा का रूप लेती जा रही है और जिसके कारण आज भी हमारा शिक्षित समाज इन कुरूतियों को दूर करने में समर्थ नही है.

हम सब एक महान विश्व की कल्पना करते हैं जिसमे सभी सुखी हों, और सभी चिंताओं से मुक्त हों, लेकिन क्या महिलाओं की भागीदारी के बिना यह सब संभव हैं, नहीं. पुरुषों और महिलाओं में समानता के बिना, यह सब संभव नही है. यदि हम एक महान संस्कृति का निर्माण करना चाहता है. तो सबसे पहले हमें अपनी सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता है. क्योंकि लैंगिक भेदभाव किसी भी राष्ट्र में सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है, जो देश को आगे बढ़ने से रोकता है.  इस तरह की बुराइयों को मिटाने के लिए महिलाओं को सशक्त बनान सबसे प्रभावशाली उपाय है.  

लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में ना केवल महिलाओं के आत्म सम्मान में वृद्धि हुई है बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है.   

महिला सशक्तिकरण के उच्चतम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है की, हर क्षेत्र में महिलाओं को बराबर का स्थान दिया जाए.

इसके साथ ही यह आवश्यक है की महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत हो. और बेहतर शिक्षा की शुरुआत बचपन से घर पर ही हो सकती है. महिलाओं के उत्थान के लिए एक स्वस्थ्य परिवार की जरूरत है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है .

आज महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने के लिए सरकार कई सारे महत्वपूर्ण कदम उठा रही है |

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तथा उनकी समस्याओं के उचित समाधान के लिए, आज (Women empowerment bill) महिला आरक्षण बिल का पास होना बेहद आवश्यक है |

महिला आरक्षण बिल, न केवल देश में एक समानता का भाव पैदा करेगा बल्कि देश के सर्वागीण विकास में भी सहायक होगा.

जिससे महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में न सिर्फ कमी आएगी बल्कि उनकी भागीदारी के हमारा देश आर्थिक और सामाजिक तौर पर आगे बढ़ पायेगा, जहाँ सब सुखी और सब खुशहाल होंगे. क्योंकि, “सशक्त नारी से ही बनेगा सशक्त समाज”

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महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण क्या है? 

महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य महिलाओं को सशक्त करने से है ताकि वे अपने जीवन, परिवार और समाज में  स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हों. यह महिलाओं को समुदाय, और समाज में उनके वास्तविक अधिकारों को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है |

महिलाएँ, आबादी का लगभग आधा

आज भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में सातवें स्थान पर है, जनसंख्या में इसका दूसरा स्थान है और केवल 2.% क्षेत्रफल के साथ भारत विश्व की जनसंख्या के 17% भाग को शरण प्रदान करता है ।

भारत तेजी से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से विकास कर रहा है, आज तेजी से विकसित हो रहे हमारे देश को सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. जो महिलाओं की भागीदारी से ही संभव हो सकता है. इसलिए आज एक बेहतर समाज और संस्कृति के निर्माण हेतु महिला सशक्तिकरण आवश्यक है |

किसी भी राष्ट्र के लिए यह आवश्यक है की वह सम्पूर्ण रूप से हर व्यक्ति को सामान अधिकार प्रदान करें. और यह सब केवल महिलाओं और पुरुषों में समानता से ही संभव हो सकता है, आज हमारे भारत देश में आबादी का लगभग आधा भाग महिलाएँ हैं और आधी आबादी को सशक्त बनाएँ राष्ट्र का विकास संभव नही हो सकता जिसके लिए महिला शक्ति का सशक्त होना बेहद आवश्यक है.

भारत में महिलाओं की जनसँख्या

आज भारत की कुल आबादी का लगभग 48.30 प्रतिशत जनसंख्या महिला है | आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक 1000 पुरुषों में 930 महिलायें है, और भारत के राज्यों में जैसे पुडुचेरी आदि जैसे राज्यों में सबसे अधिक लिंगानुपात है, जबकि दमन दीव में यह सबसे कम है |

यह आंकड़ा दर्शाता है, की आबादी के लिहाज से भी भारत में महिलाओं की जनसँख्या आबादी का लगभग आधा है.

भारत में साक्षरता / रोजगार दर

भारत में साक्षरता दर को सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति का आकलन करने के लिए एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, 2011 के आंकड़ों के अनुसार जहाँ 81 प्रतिशत पुरुष साक्षर थे वही केवल 65 प्रतिशत महिलायें साक्षर मानी जाती थी.

बैसे, हाल के वर्षों में इन आकड़ों में काफी सुधार आया है जो आने वाले समय में लगभग समान के बराबर हो जाएगा.

भारत में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता

आज भारत में महिला सशक्तिकरण की बेहद आवश्यकता है, ना केवल आर्थिक और सामाजिक सुधार के लिए बल्कि देश के  सर्वांगीण विकास का पहिया बिना महिलाओं की भागीदारी के आगे नही बढ़ सकता |

भारत में महिलाओं से सम्बंधित समस्याएँ

भारत में महिलाओं के लिए पित्रसत्ता सबसे बड़ी समस्या है, यह समझा जाता है की वह द्वितीयक लिंग है, कम कुशल है,

इस तरह के दूषित समाजिक विचारों का ही कारण है, की आज हमारे देश में महिलाओं की स्थिति अच्छी नही है आज भी अशिक्षा, जल्दी शादी और बेरोजगारी, उत्पीडन, कन्या भ्रूण हत्या, यौनशोषण, बाल विवाह, दहेज़ के लिए प्रताड़ित करना, सम्मान हत्या,  मजदूरी करवाना आदि जैसे कारण ही है जो महिलाओं को समाज में अच्छी स्थिति का अभाव करातें है. ये ऐसे सामजिक मुद्दें है, जिनकी सूची कभी समाप्त नही होती.

इसी कारण आज महिला सशक्तिकरण आवश्यक है.

स्वामी विवेकानंद के महिला सशक्तिकरण पर विचार Women Empowerment

 

Credit : India Today Social

भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार की भूमिका

वर्तमान में भारत सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त एवं सक्षम बनाने हेतु कई सारी योजनाएँ चलायी जाती है |

महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्रालय एवं भारत सरकार के द्वारा, भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई सारी योजनाएँ चलायीं जा रहीं है जो महिलाओं को समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में सहायक हो रही हैं. इन्ही में से कुछ योजनाएँ इस प्रकार है.

1) महिला हेल्पलाइन योजना

2) प्रधानमंत्री उज्जवला योजना

3) महिलाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम (स्टेप)4) महिला शक्ति केंद्र 5) बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना 6) पंचायती राज योजनाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण

7) इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना

8) कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना

9) स्वाधार घर योजना

10) किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी योजना (सबला)

आज भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण बेहद ही आवश्यक है, क्योंकि न हमारा समाज बिना महिलाओं की भागीदारी के आगे बढ़ सकता है और ना ही हमारा देश, क्योंकि नारी का सम्मान ही समाज का सम्मान है, और नारी से ही आने वाला भविष्य सुन्दर हो सकता है इसलिए आवश्यकता है की हम महिलाओं के खिलाफ अपनी पुरानी सोच को बदलें और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लायें.

निष्कर्ष

अब आप जान गएँ होगे की वर्तमान भारत में Mahila Sashaktikaran महिला सशक्तिकरण क्यों आवश्यक है, आज जिस तरह से भारत सबसे तेजी से बढती हुई अर्थव्यवस्था है, और ऐसे में हमारे समाज और देश के लिए महिलाओं को सशक्त करना बेहद आवश्यक है ताकि हमारे देश का कोई भी वर्ग विकास से वंचित न रहें और हमारे देश का समग्र विकास हो सके, इसके माध्यम से ही हम एक उन्नत समाज का निर्माण कर सकतें है |

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